स्पेशल स्टोरी
एक समय हुआ करता था जब परिवहन विभाग का नाम सबसे भ्रष्ट विभागों में आया करता था और आना भी लाजमी था क्योंकि उसका मुख्य कारण परिवहन विभाग में रहे पूर्व ट्रांसपोर्ट कमिश्नर, पूर्व ट्रांसपोर्ट एडिशनल कमिश्नर जैसे भ्रष्ट अधिकारियों ने परिवहन विभाग, मैं नौकरी के दौरान करोड़ों अरबों रुपये का भ्रष्टाचार मचा दिया था पूर्व में उस दौर में पूरे परिवहन विभाग पर प्राइवेट कटरों का बोलबाला हुआ करता था हजारों पत्रकारों के घर के चूल्हे, परिवहन विभाग के भ्रष्ट अधिकारी चलाया करते थे आलम यह था कि एक तवायद के कोठे से भी बततर हालत परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कर दी थी और इसमें गलती उन पत्रकारों की नहीं थी इस पूरे भ्रष्टाचार का नेक्सेस पूर्व रहे परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के हाथ में था इन अधिकारियों द्वारा अरबों खरबों की संपत्ति बना ली थी भोपाल इंदौर दिल्ली मुंबई जैसे बड़े शहरों में इनकी आज भी करोड़ों की संपत्तियां डली हुई है पूर्व में कुछ परिवहन कमिश्नर तो ऐसे रहे, जिन्हें लड़कियों का इतना ज्यादा चस्का लगा हुआ था कि वे अपने विभाग की कई टीएसआईओ को भी निशाना बना चुके हैं भोपाल के कई बड़े होटलों में इन वरिष्ठ अधिकारियों ने अय्याशी का ऐसा नंगा नाच नचाया है जिसकी कल्पना लोगों की सोच के परे है और यही सबसे बड़ा कारण था, इस परिवहन विभाग की बदनामी का लेकिन बात आज के समय की की जाए तो पिछले साल जब विवेक शर्मा जैसे दबंग परिवहन कमिश्नर ने इस विभाग की कमान संभाली थी तब से इस परिवहन में चल रहे भ्रष्ट नेक्सेस को तोड़ना शुरू कर दिया पूर्व कमिश्नर विवेक शर्मा ने इस परिवहन विभाग में चल रहे पूरे भ्रष्टाचार की कमर को तोड़ना शुरू कर दिया विवेक शर्मा की एक साल की नौकरी में परिवहन विभाग में करीब 70% भ्रष्टाचार को कम कर दिया, चीजें सुधरने लगीं।विभाग में पारदर्शिता आने लगी आरटीआई टीएसआई भी अपने कार्य को ईमानदारी से करने लगे और आखिर करेंगे भी क्योंकि सबसे बड़ा कारण था इन ईमानदार टीएसआई और आरटीआईों से पूर्व में रहे भ्रष्ट कमिश्नर जैसे जैन सक्सेना मधुकुमार गुप्ता इत्यादि इनके द्वारा इन आरटीआई टीएसआई से जबरदस्ती भ्रष्टाचार कराया करते थे और जो भी टीएसआई एवं आरटीआई उन भ्रष्ट वरिष्ठों की बात नहीं मानते थे उन्हें लूपलाइन का रास्ता दिखाकर परेशान किया जाता था और टीएसआई। एवं आरटीआई से जबरदस्ती भ्रष्टाचार कराया जाता था
आज का परिवहन विभाग
बात की जाए तो वर्ष 2025 से लेकर आज दिनांक तक की विवेक शर्मा की पदस्थापना जब परिवहन विभाग में हुई तब भ्रष्टाचार भ्रष्टाचार पर लगाम लगना शुरू हो गया।पुरानी नीति खत्म होने लगी तथाकथित भिगमंगे दल्ले टाइप के पत्रकार सड़कों पर आने लगे फर्जी टाइप के ड्राइवरों के मसीहाओ का हुक्का। पानी बंद होने लगा वहीं जैसे जैसे समय बीतता गया परिवहन विभाग में पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ कार्य संचालित होने लगा एक समय ऐसा भी आया जब पूर्व कमिश्नर विवेक शर्मा ने स्टडी लीव का आवेदन लगाकर विदेश जाने का फैसला लिया, जिसके बाद सरकार ने विवेक शर्मा का आवेदक स्वीकार कर उन्हें परिवहन विभाग से विदाई दी जिसके बाद विभाग में एंट्री हुई ईमानदार होनहार आईपीएस उमेश जोगा की जोगा सांप के बारे में जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है और ये तारीफ हम नहीं कर रहे यह तारीफ करता है पूरा उज्जैन क्योंकि उज्जैन में एडीजी के पद पर रहते हुए उज्जैन जैसे क्राइम सिटी को हैंडल करना बहुत बड़ी बात थी, लेकिन आईपीएस उमेश जोगा की बेहतरीन कार्यशैली के चलते उज्जैन में क्राइम का ग्राफ जीरो पहुंच गया जिससे खुश होकर मध्यप्रदेश सरकार ने परिवहन विभाग की जिम्मेदारी उमेश जोगा के हाथ में सौंपी उमेश जोगा ने ज्वाइनिंग के पहले दिन से ही सबसे पहला बार परिवहन विभाग में पल रहे प्राइवेट कट्टरों पर किया मध्यप्रदेश के सभी चेकिंग प्वाइंटों पर चोरी छुपे, अवैध वसूली करने वाले प्राइवेट कटरों की लंका लगा दी और चेक पॉइंटों पर पदस्थ शासकीय अमले को फील्ड पर तैनात कर उनसे ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ कार्य कराना शुरू कर दिया जिसके बाद जो भी थोड़ा बहुत भ्रष्टाचार परिवहन विभाग मैं हुआ करता था वो आज के दिनांक में टोटल बंद हो गया जिसका इम्पैक्ट आज देखने को मिल रहा है कई बड़े बड़े अखबार संस्थान, मीडिया ग्रुप समाजसेवी छुटपुट, नेता सड़कों पर आना शुरू हो गया, जिससे फड़फड़ाकर उन्होंने एक ईमानदार आईपीएस, जिस पर आज दिनंग तक कोई दाग नहीं लगा है उस आईपीएस के बारे में अरनगल, खबरें झूठी शिकायतें करना शुरू कर दी जबकि मध्यप्रदेश में इस समय अवैध वसूली टोटल बंद है इसी बात से नाराज होकर लोगों ने परिवहन विभाग को बदनाम करने की नई स्कीम बना रखी है
